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Tuesday, 11 July 2017

श्री अमरनाथ यात्रा और सुरक्षा

                                               जम्मू-कश्मीर स्थिति श्री अमरनाथ बाबा की पवित्र गुफा में दर्शन की वार्षिक यात्रा पर जिस तरह से अंनतनाग में आतंकियों ने हमला किया है वह अपने आप में बड़ी घटना तो है ही साथ ही व्यवस्था से अलग चलने वालों के लिए एक सबक भी है प्रारंभिक खबरों में अधिकारियों की तरफ से जिस तरह से यह बात कही गयी कि यह बस नियमों का उल्लंघन करके रात के प्रतिंबंधित समय में चल रही थी वहीं बस मालिक का कहना है कि उसकी बस भी यात्रा में शामिल थी पर टायर पंक्चर होने के चलते वे काफिले से अलग हो गया थे. यह वार्षिक यात्रा विभिन्न सुरक्षा कारणों से सदैव ही केंद्र और राज्य सरकार के लिए चुनौती और चिंता का विषय बनी रहती है और पिछले वर्ष इस यात्रा से पहले ही आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से लगातार यात्रा पर भी प्रभाव पड़ता नज़र आ रहा है. घाटी में संपन्न होने वाली यह वार्षिक यात्रा दक्षिणी कश्मीर के लिए व्यापार के व्यापक आयामों को लेकर आती है क्योंकि पूरे देश और विदेशों से भी आने वाले यात्रियों से उनको अच्छी खासी कमाई भी हो जाती है पर पिछले दशक से जिस तरह से पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा इस यात्रा को निशाने पर लेकर सुरक्षा सम्बन्धी चिंताओं को उभारने का काम किया जा रहा है उसके बाद भी यात्रियों की संख्या में कोई कमी नज़र नहीं आ रही है.
                     निश्चित तौर पर हर मुद्दे पर राजनीति करने वालों के लिए एक दूसरे पर आरोप लगाने के लिए यह सही समय है पर इस सबके बीच केंद्र और जम्मू कश्मीर राज्य सरकारों को एक बार फिर से इस पर विचार करना चाहिए कि भविष्य में इस तरह की स्थिति से किस तरह बचा जा सकता है. यात्रा में शामिल किसी वाहन के ख़राब होने की दशा में यात्रा सुरक्षा प्रभारी के पास क्या विकल्प शेष बचते हैं यह सोचने और उस पर अमल किये जाने की आवश्यकता है क्योंकि किसी तकनीकी गड़बड़ी से यात्रा में शामिल कोई भी वाहन कभी भी ख़राब भी हो सकता है. इसके साथ ही जम्मू से निकलते समय यात्रा में शामिल सभी वाहनों की सघन जांच भी तेज़ी से किये जाने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए जिससे इस तरह की परिस्थिति सामने आने की दर को और कम या नगण्य किया जा सके. यह ऐसी परिस्थिति थी जिसके बारे में संभवतः सरकार ने भी नहीं सोचा था इसलिए यात्रा के बीच में ही किसी भी ख़राब होने वाले वाहन के यात्रियों की सुरक्षा के बारे में अब नए सिरे से रणनीति बनाये जाने की आवश्यता भी है. विशेष अपरिहार्य परिस्थितयों में पूरे काफिले को रोकना अधिक खतरनाक हो सकता है इसलिए यदि संभव हो तो घाटी में पड़ने वाले यात्रा मार्ग में हर १० किमी पर एक वैकल्पिक बस की व्यवस्था किये जाने के बारे में सोचा जाना चाहिए या फिर यात्रा के साथ हर दिन एक खाली बस भी इस तरह की किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए चलनी चाहिए.
                 सुरक्षा इनपुट्स के बाद इस परिस्थिति में यात्रा के साथ चलने वाले जवानों को भी इस बात के लिए स्पष्ट दिशा निर्देश होने चाहिए कि इस तरह की परिस्थितियों में उनके लिए क्या विकल्प उपलब्ध हैं और उन्हें किन पर अमल करना चाहिए. यात्रा के महत्व और उससे जुडी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ही मजबूर होकर अलगाववादियों तक को इस घटना की निंदा करनी पड़ी है और अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी भी नहीं ली है. यह ऐसा समय है जब पूरे देश के लोगों को मारे गए लोगों के साथ संवेदना है और साथ ही इस बात की आशा भी है कि पूरा देश इस परिस्थिति से भी निपटने में सक्षम है. जिन लोगों ने इस यात्रा में भाग लिया है वे जानते हैं कि यात्रा मार्ग कितना दुरूह और दुर्गम है तो ऐसे किसी भी माहौल में सरकार से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी की बात करना ही बेमानी है क्योंकि हर सरकार की तरफ से इसे सकुशल संपन्न कराने के लिए यथ संभव प्रयास किये जाते रहे है फिर भी कभी कभी इस तरह की घटनाएं होती ही रहती हैं. यात्रा में जाने वाले यात्रियों और उनके वाहन चालकों से भी इस बात की अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का पूर्ण रूप से पालन करेंगें तथा किसी भी विपरीत परिस्थिति में उसी तरह से धैर्य बनाये रखेंगे जैसे कल की घटना में चालक सलीम ने घटना स्थलपर चल रही गोलियों के बीच से गाड़ी को भगाने में सफलता पायी थी जिससे बहुत सारी जाने बचायी जा सकीं.  
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